स्थान: रुड़की

संवाददाता: गौरव व्यास
रुड़की: शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के नगर निगम के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। जिस कचरा प्रबंधन व्यवस्था का जिम्मा नागरिकों को बीमारियों से बचाना है, वही व्यवस्था अब खुद शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य का बड़ा संकट बन चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
रुड़की शहर को कचरा-मुक्त और सुंदर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने विभिन्न इलाकों से स्थायी कूड़ेदान तो हटा दिए हैं, लेकिन कचरे के सुरक्षित उठान और परिवहन के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
खुले में कचरे का परिवहन: शहर के विभिन्न इलाकों से कचरा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बिना ढके ही भरकर ले जाया जा रहा है। चलते वाहनों से कचरा सड़कों पर गिरता है और उसकी दुर्गंध पूरे रास्ते फैलती है।
अस्पतालों का बायोमेडिकल वेस्ट: सबसे गंभीर और चिंताजनक बात यह है कि साधारण घरेलू कचरे के साथ ही अस्पतालों और क्लिनिकों से निकलने वाला खतरनाक मेडिकल वेस्ट (संक्रमित पट्टियां, सिरिंज, दवाइयां आदि) भी खुलेआम बिना किसी सुरक्षा मापदंड के ढोया जा रहा है।
बरसाती मौसम में दोहरा खतरा: वर्तमान में बारिश के मौसम के कारण सड़कों पर फैला यह कचरा सड़ रहा है। इससे संक्रामक बीमारियों, डेंगू, मलेरिया और हैजा जैसी महामारियों के तेजी से फैलने का अंदेशा बढ़ गया है।
हरिद्वार बनाम रुड़की: नियमों की दोहरी नीति
स्थानीय प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। पड़ोसी जिले हरिद्वार में इसी तरह खुले में कचरा ले जाने और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर नगर निगम की गाड़ियों पर ही 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इसके विपरीत, रुड़की में खुलेआम कचरा ढोकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि नगर निगम तुरंत ढके हुए कचरा वाहनों (Compactor Trucks) का इस्तेमाल शुरू करे और अस्पतालों के मेडिकल वेस्ट का निपटान नियमों के तहत सुनिश्चि
त कराए।






