हरिद्वार महाकुंभ मेले में स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले सफाई कर्मचारियों और पर्यावरण मित्रों के हक के लिए राज्य सफाई कर्मचारी आयोग ने कड़ा रुख अपना लिया है! डामकोठी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में 500 रुपये प्रतिदिन के मानदेय को नाकाफी बताते हुए इसमें बढ़ोतरी, आवास-भोजन की बेहतर व्यवस्था, मृतक आश्रितों को योग्यतानुसार लिपिक पद पर नियुक्ति और ठेका कर्मचारियों को समय पर वेतन देने जैसे कई अहम मुद्दों पर प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया है। पढ़िए पूरी विस्तार से खबर और जानिए क्या रहे बैठक के मुख्य बिंदु! #UttarakhandNews #KumbhMela2026 #Haridwar #SafaiKarmchari #UttarBharatiNews #GauravVias #NewsUpdate #GroundReport
उत्तर भारतीय न्यूज़
हरिद्वार | गौरव व्यास
हरिद्वार में आगामी महाकुंभ मेले की तैयारियों के बीच सफाई कर्मचारियों और पर्यावरण मित्रों के हितों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने डामकोठी में कुंभ मेला और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पर्यावरण मित्रों के मानदेय, सुरक्षित आवास, खान-पान और सेवा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि मेले के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारू बनाया जा सके।
बैठक के दौरान उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि दिसंबर माह में प्रस्तावित पर्यावरण मित्रों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले कर्मचारियों की तमाम जायज समस्याओं का ठोस समाधान निकाला जाना अनिवार्य है। उन्होंने मेला प्रशासन को निर्देश दिए कि आगामी एक सप्ताह के भीतर कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाए, जिससे उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
चर्चा का एक मुख्य केंद्र पर्यावरण मित्रों के लिए तय दैनिक मानदेय का मुद्दा रहा। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रस्तावित 500 रुपये प्रतिदिन के मानदेय पर दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर हरिद्वार में कार्य करना और जीवनयापन करना बेहद कठिन होगा। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने मानदेय में उचित वृद्धि करने, कर्मचारियों के आवागमन के लिए किराये का प्रबंध करने के साथ-साथ उनके रहने, खाने और उनके बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर विशेष ध्यान देने की जोरदार वकालत की। साथ ही, उन्होंने इस मानदेय को बढ़ाने के संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी विशेष आग्रह किए जाने की जानकारी दी।
बैठक में मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में बरती जा रही अनियमितताओं का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बताया कि कुछ मामलों में इंटरमीडिएट और स्नातक जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को भी पर्यावरण मित्र के पद पर नियुक्त किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करवाएं और शासनादेश के प्रावधानों के अनुरूप संबंधित शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर लिपिक (क्लर्क) या अन्य उपयुक्त पदों पर नियुक्तियां सुनिश्चित करें।
इसके अतिरिक्त, आउटसोर्सिंग या ठेके पर कार्य कर रहे सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने की समस्या पर भी गहन मंथन किया गया। उपाध्यक्ष ने संबंधित विभागों और ठेकेदारों को कड़ी हिदायत दी कि कर्मचारियों का वेतन हर हाल में समयबद्ध तरीके से उनके खातों में पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इन मेहनतकश कर्मचारियों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से लें और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएं।

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