
उत्तर भारतीय न्यूज (Uttar Bharati News)
रिपोर्टर: गौरव व्यास (विशेष संवाददाता)
स्थान: बनबसा (चंपावत)
भारत-नेपाल सीमा पर पहली बार सजी धामी कैबिनेट: बनबसा में ऐतिहासिक बैठक, 24 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर
बनबसा/चंपावत:
उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक बैठक चंपावत जिले के भारत-नेपाल सीमा स्थित बनबसा (NHPC परिसर) में संपन्न हुई। प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक शासन की पहुंच को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक कसावट, रोजगार सृजन और जनसुविधाओं से जुड़े 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंत्रिमंडल ने हरी झंडी प्रदान की। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि अब राज्य सरकार की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया केवल राजधानी देहरादून तक सीमित न रहकर प्रदेश के विभिन्न जनपदों और सीमांत अंचलों तक पहुंचेगी।
मंत्रिमंडल ने प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने तथा राजस्व में पारदर्शिता लाने के लिए कई बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं। स्टाम्प एवं निबन्धन विभाग के अंतर्गत संपत्तियों के क्रय-विक्रय हेतु क्रेता और विक्रेता के पैन (PAN) सत्यापन की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और आयकर विभाग को शुद्ध डेटा उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेधारकों व कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने तथा नैनीताल के लालकुआं और देहरादून के जौनसार-बावर में भूमि विनियमितीकरण को वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष का विस्तार देने का बड़ा निर्णय लिया गया। वन संरक्षण मामलों के त्वरित ऑनलाइन निस्तारण के लिए नोडल कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के गठन व 6 नए पदों को मंजूरी दी गई।
प्रदेश के अवसंरचनात्मक विकास और राजकोषीय अनुशासन को मजबूती देने के लिए मंत्रिमंडल ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण हेतु उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TDC) को ₹66.29 करोड़ की अवशेष राशि जारी करने का अनुमोदन किया। साथ ही, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को स्वीकृति दी गई, जिसके तहत वर्ष 2026 से 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP के 3% और कुल संचयी ऋण की सीमा 30% निर्धारित की गई है। इसके अलावा, औपनिवेशिक काल के अप्रचलित ‘उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873’ को समाप्त कर राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल ‘उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने का निर्णय लिया गया है।
युवाओं के कौशल विकास, रोजगार और कर्मचारियों के प्रशासनिक ढांचे में सुधार हेतु भी विस्तृत योजनाएं तय की गई हैं। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे लगभग 1.19 लाख छात्रों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से ₹200 करोड़ के बजट के साथ ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026’ शुरू करने को मंजूरी मिली। कुक्कुट पालकों को राहत देते हुए सब्सिडी का भुगतान अब ई-रूपी के बजाय सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए किया जाएगा। समूह ‘ग’ की भर्तियों में पारदर्शिता लाते हुए उप कारापाल (सब-जेलर) के पद से साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। वहीं, राज्य कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी आचरण नियमावली को अखिल भारतीय सेवा मानकों के अनुरूप अद्यतन किया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा समय-समय पर अपडेट करना होगा।
सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में नरेंद्रनगर (टिहरी) में 133 राजस्व गांवों को कवर करने वाले नए उप-निबंधक कार्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के बेहतर अभिसरण एवं अनुश्रवण के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित किया गया है। साथ ही, सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के ढांचे का पुनर्गठन कर नवीन पदों का सृजन किया गया तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के क्रम में राज्य की कानूनी धाराओं व व्यवस्थाओं को भी अपडेट करने पर सहमति बनी।







