हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने ‘राज्य एकीकृत क्षेत्र’ (SIR) सर्वेक्षण प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘जनता दरबार’ के दौरान आम लोगों की समस्याएं सुनते हुए विधायक ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र की ओर से लक्षित तरीके से पक्षपात और व्यापक अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

वन गुर्जर समुदाय को लक्षित करने का आरोप
जनता दरबार में विधायक ने खुलासा किया कि क्षेत्र के वन गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लगभग 868 लोगों को प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। जब प्रभावित लोग अपनी पहचान, वैधता और अधिकारों को सिद्ध करने के लिए आवश्यक सरकारी दस्तावेज जैसे ‘परिवार रजिस्टर की नकल’ मांगने ब्लॉक या तहसील कार्यालय पहुंच रहे हैं, तो प्रशासनिक अधिकारी उन्हें यह दस्तावेज देने में जानबूझकर टालमटोल कर रहे हैं। अनुपमा रावत ने कहा कि एक तरफ नोटिस जारी कर नागरिकता व पहचान के साक्ष्य मांगे जा रहे हैं और दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड देने से इनकार कर उन्हें अपने बचाव के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
फर्जी आपत्तियों का बड़ा मामला आया सामने
प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए विधायक रावत ने क्षेत्र के एक विशिष्ट गांव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस गांव में 185 मतदाताओं को सरकारी नोटिस थमाए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया है कि इन सभी 185 लोगों ने अपनी साख और मतदाता स्थिति को लेकर खुद ही आपत्तियां (objections) दर्ज कराई थीं। विधायक ने इसे पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने ही खिलाफ आपत्ति दर्ज नहीं कराता। यह साफ तौर पर रिकॉर्ड में हेरफेर और जालसाजी का मामला है।
कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
विधायक अनुपमा रावत ने एसआईआर सर्वेक्षण की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे एक ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित साजिश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि विकास या सत्यापन के नाम पर चलाए जा रहे इस अभियान की आड़ में एक वर्ग विशेष को जानबूझकर मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया जाएगा:
अधिकारियों की जवाबदेही: गड़बड़ी और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने में शामिल दोषी प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
कानूनी कदम: प्रभावित नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए वह इस पूरे मामले को अदालत में ले जाएंगी और कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।
विधायक ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि पात्र और वैध नागरिकों को परेशान करना तुरंत बंद नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदो
लन करेगी।






